प्रशंसक

मंगलवार, 12 मई 2009

हिन्दी हो सभी भाषाओँ की सिरमौर

कल सुबह ही अख़बार पढ़ते हुए मेरी नज़र इस समाचार पर पड़ी की वर्ष २००९ के लिए अंतर्राष्ट्रीय इंदु शर्मा कथा सम्मान उपन्यासकार भगवानदास मोरवाल को दिया जाएगा। उन्हें यह सम्मान उनके उपन्यास 'रेत' के लिया मिला है। 'रेत' का प्रकाशन वर्ष २००८ में राजकमल प्रकाशन से हुआ था।
सर्वप्रथम मोरवाल जी को बहुत बहुत बधाई। एक हिन्दी प्रेमी होने के नाते मेरी नज़र इस ख़बर पर पड़े बिना नही रह सकी। अख़बार भी हिन्दी का था और ख़बर भी पहले पन्ने पर छपी थी। किंतु ख़बर को और अधिक विस्तार के साथ और अधिक स्थान मिलना चाहिए था। अंग्रेज़ी भाषा के बुकर पुरस्कार की शोर्ट लिस्टिंग के समय तो सारे अख़बार अन्तिम ५ रचनाओं की आलोचनात्मक टिपण्णी से भरे रहते हैं। किंतु इस ख़बर में न तो लेखर के बारे में न ही उसकी रचना के बारे में कुछ छापा था।
भारतीय सरकार को अंतर्राष्ट्रीय स्तार का पुरस्कार स्थापित करना चाहिय जिसमे समस्त विश्व की हिन्दी रचनाओं को शामिल किया जन चाहिय। जब अंग्रेज़ी भाषा का जनक देश इंग्लैंड बुकर पुरस्कार के मध्यम से अंग्रेज़ी भाषा और साहित्य का झंडा फेहरा रहा है तो ऐसा ही प्रयास हम क्यूँ नहीं कर सकते?
हिन्दी साहित्य का अनुवाद दुनिया की सभी प्रमुख भाषाओँ में किया जन चाहिए ताकि दुनिया भर के लोग हिन्दी साहित्यकारों की सोच, उनकी वैचारिक परम्परा और दूरदर्शिता को समझ सकें। इससे अधिकाधिक लोग हिन्दी भाषा सीखने के लिया प्रेरित होंगे और वे भारतीय भी अपनी संस्कृति की और लौटने को तत्पर होंगे जो विदेशी रंग में रंग कर भारतीय परम्पराओं और आदर्शों को भूल चुके हैं।

12 टिप्‍पणियां:

Abhishek Mishra ने कहा…

स्वागत ब्लॉग परिवार में.

प्रकाश गोविन्द ने कहा…

"हिन्दी साहित्य का अनुवाद दुनिया की सभी प्रमुख भाषाओँ में किया जन चाहिए ताकि दुनिया भर के लोग हिन्दी साहित्यकारों की सोच, उनकी वैचारिक परम्परा और दूरदर्शिता को समझ सकें।"

बढ़िया बात कही आपने !
साधुवाद !

दिगम्बर नासवा ने कहा…

आपकी बात से मैं इत्तेफाक रखता हूँ............बधाई है Indoo जी को

संगीता पुरी ने कहा…

बहुत सुंदर…..आपके इस सुंदर से चिटठे के साथ आपका ब्‍लाग जगत में स्‍वागत है…..आशा है , आप अपनी प्रतिभा से हिन्‍दी चिटठा जगत को समृद्ध करने और हिन्‍दी पाठको को ज्ञान बांटने के साथ साथ खुद भी सफलता प्राप्‍त करेंगे …..हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।

Nirmla Kapila ने कहा…

आपने बिलकुल सही कहा है आप जेसे प्रबुध व्यक्तित्व को पा कर ये ब्लोग जगत धन्य हुआ अभार और शुभकामनाये

sanjaygrover ने कहा…

हुज़ूर आपका भी ....एहतिराम करता चलूं .......
इधर से गुज़रा था, सोचा, सलाम करता चलूं ऽऽऽऽऽऽऽऽ

ये मेरे ख्वाब की दुनिया नहीं सही, लेकिन
अब आ गया हूं तो दो दिन क़याम करता चलूं
-(बकौल मूल शायर)

सतीश चन्द्र मिश्र ने कहा…

ब्लॉग जगत में आपका स्वागत है

रवि कुमार ने कहा…

हिन्दी हो सभी भाषाओँ की सिरमौर..

तो फिर सभी इसी तर्क से अंग्रेजी को या किसी अन्य भाषा को सिरमोर बनाना चाहेंगे तो उफ़..क्या होगा...इतने सारे सिरमोर..या एक और विश्वयुद्ध..

सभी बोलने बालों को यदि उनकी मातृभाषा मिल जाए..मतलब उसी में उनकी दुनिया सज जाए तो क्या बेहतर नहीं रहेगा...

पूरी दुनिया से उनका श्रेष्ठ छीना जा रहा है...
हम अपनी भाषा को बोल-लिख कर ही बचा सकते हैं...
और इस अतिक्रमण के विरूद्ध अपना अलख जगा कर...
आप दोनो काम बेहतर कर रहे हैं..

शुभकामनाएं....

दिल दुखता है... ने कहा…

हिंदी ब्लॉग की दुनिया में आपका तहेदिल से स्वागत है....

नारदमुनि ने कहा…

narayan narayan

Yamini Gaur ने कहा…

well done....& welcome to my blog...

Yamini Gaur ने कहा…

well done.....& welcome to my blog....